Sunday, April 25, 2010

वेडं मन | e-Mumbaikar

वेडं मन | e-Mumbaikar

नेहमीचंच ते हसणं बोलणं,
पण हवंहवंस का वाटू लागतं?
“फक्त मैत्री” म्हणता म्हणता
मैत्रीची सीमा का गाठू लागतं?

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